हाथरस मामला:  बलात्कार साबित करने के लिए शुक्राणु की उपस्थिति जरूरी नहीं; यूपी पुलिस कानून के विपरीत दावा !

18-15
18-15

press to zoom
01_10_2020-sit_sit_sut_20818461_11252620
01_10_2020-sit_sit_sut_20818461_11252620

press to zoom
unnamed
unnamed

press to zoom
18-15
18-15

press to zoom
1/4

उत्तर प्रदेश पुलिस ने दावा किया है कि हाथरस की 19 वर्षीय दलित महिला के साथ कोई बलात्कार नहीं हुआ, जिसने कल उसकी चोटों के कारण दम तोड़ दिया।

यूपी पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के परिणाम में मृत महिला के शरीर में वीर्य के नमूनों की मौजूदगी नहीं थी। “एफएसएल की रिपोर्ट में भी है यह स्पष्ट रूप से कहता है कि नमूनों में शुक्राणु नहीं थे। यह स्पष्ट करता है कि कोई बलात्कार या सामूहिक बलात्कार नहीं था, ”एडीजी (कानून और व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने कहा।

इस तरह के बयानों के साथ, पुलिस ने 22 सितंबर को महिला द्वारा दी गई मरण घोषणा का खंडन करने का प्रयास किया कि उसके साथ चार पुरुषों ने बलात्कार किया था।

साल 2018 में यौन अपराधों से जुड़े कानून में संशोधन के बाद इस बारे में एक स्पष्ट परिभाषा दी जा चुकी है। आईपीसी की धारा-375 में रेप मामले में विस्तार से परिभाषित किया गया है। इसके तहत बताया गया है कि अगर किसी महिला के साथ कोई पुरुष जबरन शारीरिक संबंध बनाता है तो वह रेप होगा।

साथ ही मौजूदा प्रावधान के तहत महिला के साथ किया गया यौनाचार या दुराचार दोनों ही रेप के दायरे में होगा। इसके अलावा महिला के शरीर के किसी भी हिस्से में अगर पुरुष अपना प्राइवेट पार्ट डालता है, तो वह भी रेप के दायरे में होगा।

यूपी पुलिस की दलील सवालों के घेरे में

इन दोनों दलीलों पर यूपी पुलिस की ये थ्योरी कि चूंकि पीड़िता के शरीर पर सीमन के अंश नहीं मिले हैं, ऐसे में यह नहीं माना जा सकता कि उसका रेप हुआ है अब सवालों के घेरे में है। एडीजी प्रशांत कुमार लगातार इस बात को साबित करने में जुटे हैं कि हाथरस में हुए कांड के दौरान पीड़िता के साथ बलात्कार नहीं हुआ। पुलिस का कहना है कि ये सिर्फ हत्या का केस है, लेकिन परिवार का कहना है कि उनकी बेटी के साथ बलात्कार और बर्बरता की गई, जिसके कारण उसकी मौत हुई।

एडीजी ने दिया था बयान

पुलिस के एडीजी लॉ ऐंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने मंगलवार को दावा किया कि हाथरस में 19 साल की युवती के साथ रेप नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि युवती की मौत गले में चोट लगने और उसके कारण हुए सदमे की वजह से हुई थी। फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट से भी यह साफ जाहिर होता है कि उसके साथ बलात्कार नहीं हुआ।

'माहौल खराब करने को पेश हुए गलत तथ्य'

प्रशांत कुमार ने कहा कि वारदात के बाद युवती ने पुलिस को दिए बयान में भी अपने साथ बलात्कार होने की बात नहीं कही थी। उन्होंने कहा कि उसने सिर्फ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया था। कुमार ने कहा कि सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने और जातीय हिंसा भड़काने के लिए कुछ लोग तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'पुलिस ने हाथरस मामले में तुरंत कार्रवाई की और अब हम उन लोगों की पहचान करेंगे जिन्होंने माहौल खराब करने और प्रदेश में जातीय हिंसा भड़काने की कोशिश की।'